Friday, March 15, 2013


चार दिन की जिन्दगी सो कन्धा भी दिया चार ने 
इंतजाम ठीक है सुकून सहारा दिया इस विचार ने

बस भाग दौड़ करते रहिये जिन्दगी मौत के बीच 
भाई वैसे क्या गणित लगायी उस परवरदिगार ने

प्रेम लूट छिनैती छिनारा सब किया चार दिन में 
कह रहा है चार दिन छकाया मौत के इंतजार ने 

राम का नाम कभी लिया नहीं जब तक जान थी 
पर उसी को सत्य कहा अंतिम बिदाई के कहार ने 






No comments:

Post a Comment