चार दिन की जिन्दगी सो कन्धा भी दिया चार ने
इंतजाम ठीक है सुकून सहारा दिया इस विचार ने
बस भाग दौड़ करते रहिये जिन्दगी मौत के बीच
भाई वैसे क्या गणित लगायी उस परवरदिगार ने
प्रेम लूट छिनैती छिनारा सब किया चार दिन में
कह रहा है चार दिन छकाया मौत के इंतजार ने
राम का नाम कभी लिया नहीं जब तक जान थी
पर उसी को सत्य कहा अंतिम बिदाई के कहार ने
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