Friday, October 4, 2013

पलके बिछा राह जोहता ही रहा मै खड़े खड़े
कान को भेदते रहे तेरे शब्द वो भी कड़े कड़े 
मै तो नाचता ही रहा हूँ तेरे इशारे पर हरदम
फिर क्यों कर दिया मेरे अध्यादेश के टुकड़े
Photo: पलके बिछा राह जोहता ही रहा मै खड़े खड़े
कान को भेदते रहे तेरे शब्द वो भी कड़े कड़े  
मै तो नाचता ही रहा हूँ तेरे इशारे पर हरदम
फिर क्यों कर दिया मेरे अध्यादेश के टुकड़े

बंद करो यह खींचातान सबकी शिक्षा हो समानPhoto

ता उम्र वह बेईमानी करता रहा 
ले आड़ ईमानदारी के लफ्ज़ो की
दोनों हाथ से तालिया बजाते रहे 
सुन खिस्से उसके बाग़ सब्जों की


जिसके भी बदन पर----खादी हो 


गुंडई करने की --उसे आज़ादी हो 



खिलाफत करने वालो के घर की 


नीलामी कुर्की की -----मुनादी हो


कुल्हाड़ी मत मारना अपने ही पावँ में 


छुपी सिर्फ़ मक्कारी नेताओ के दांव में


सब कुछ बिक जाय ज़मीर नहीं बेचना 


नेता ऐसे ही लुभायेगे अगले चुनाव में

हमेशा युद्ध का अखाढ़ा यह हिन्दुस्तान बनेगा 
जब तक चुनावी मुद्दा हिन्दू मुसलमान बनेगा 
बेशर्म कौनो नहीं उठाता कोई विकास का मुद्दा
उसे पता है उसके ये दरवाजे का स्वान बनेगा
हम जिंदाबाद मुर्दाबाद करे चन्द रूपये खातिर 
ऐसे में तो देश स्वर्ग की वजाय श्मशान बनेगा

Thursday, October 3, 2013

वो धोखा होई गवा हमका कांग्रेस के प्यार मा
खटिया खड़ी होई हमरी अब तो कारागार मा
चिहुक उठा सुबह को जागा देखि भोली सूरत
सोचा इससे मिल ही लू निकाल कोई मुहूरत
मिलने पर वो हंस के बोली तेरी नहीं जरुरत
बप्पा धोखा होई गवा हमका कांग्रेस के प्यार मा
खटिया खड़ी होई हमरी अब तो कारागार मा

मौज मरनी कईनी घोटाला लगौनी आग जवानी में 
जो आयल बुढापा जेले गईनी गईल भैसिया पानी में 
कोशिश कईनी पर ना बचनी लागल लगाम बानी में 
कैसे मुंह देखईबा लोग कहेन अब पटना राजधानी में

Wednesday, October 2, 2013

क़ाश ऐसन ही माहौल अब, गउअन गउअन हो जाता 

छँटाक भर माँगित मोहब्बत, बढ़ के पउवन हो जाता

 काव बताई इ कानून के, गनीमत इन पर न लागू हौ 

फिर ऐसे मोहब्बत पे, तो मुकदमा झऊअन हो जाता 

Photo: क़ाश ऐसन ही माहौल अब, गउअन गउअन हो जाता 
छँटाक भर माँगित मोहब्बत, बढ़ के पउवन हो जाता   
काव बताई इ कानून के, गनीमत इन पर न लागू हौ  
फिर ऐसे मोहब्बत पे, तो मुकदमा झऊअन हो जाता

नकली गाँधी नाम पे तोहरे, खेला खेले गान्ही जी 
पीछे भागे तोहरे फोटो के, ये सारे चेले गान्ही जी 
लागत कुछ पकडे गए, ये लोकतंत्र का काम हुआ 
ये चक्कर में दुय गो ससुरा, गईने जेले गान्ही जी

Tuesday, October 1, 2013

उसने बात तो बड़ी जज्बाती कहा

मुझको ससुरा औरत देहाती कहा 

झूठवे चिल्लाता है ताकत नहीं है 

नाम का शरीफ है शराफत नहीं है

इससे अच्छी जनता अमरीकी रही 

पप्पू की वजह से यात्रा फीकी रही

Photo: उसने बात तो बड़ी जज्बाती कहा 
मुझको ससुरा औरत देहाती कहा 
झूठवे चिल्लाता है ताकत नहीं है 
नाम का शरीफ है शराफत नहीं है
इससे अच्छी जनता अमरीकी रही    
पप्पू की वजह से यात्रा फीकी रही

पांच रूपये में करो, अब भोजन भर पेट 
कानून ने पूरी तरह, इनको लिया लपेट 
जेल में इनकी कब्र पर, लगेगी यूँ फफूंद
बेरोजगारों की आह को, अब जाने मसूद 
है कानून करने लगा, अब अपना काम
चोरी बेईमानी में, इससे लगेगी लगाम