Sunday, March 31, 2013


आये थे ढाढ़स बधा के गए होली में
गुझिया पापड़ सधा के गए होली में 

देखेगे देखते है अच्छा ख़ुदा हाफ़िज़
वो क्लोरोफार्म सूघां के गए होली में

वो दगा में हम तीमारदारी में डटे रहे   
हर रोवाँ फिर सुलगा के गए होली में

कितना जाल में जादू है बहेलिये के  
परिंदों को फिर लुभा के गए होली में    


Tuesday, March 26, 2013


कोई देशी तो कोई अंग्रेजी की तलास में 
हम तो लेकर मस्त है ठंडाई गिलास में 
कोई साली कोई सरहज संग खेल रहा है 
हम अभी बैठे है एक भौजी की आस में
हमही संग खेल लो मेहरारू बोल रही है 
मैंने कहा डिस्टर्ब न करो मौके खास में 
काला रंग सुना गायब है आज शहर से
मुहं पर पुतने गया नेताओ के पास में



क्या नेताओ का लेनादेना, होली के इन रंगों से 
जो खून की होली खेले, मनाये दिवाली दंगो से

रहे निगाहे इनकी हरदम, महिलाओ के अंगो पे
कैसे हम एतबार करे, इन वोटो के भिखमंगो पे

भारत माँ की धरती की, तुम करुण पुकार सुनो 
बुला रहा तिरंगा अपना, उसकी वो चीत्कार सुनो

अगर अब नहीं चेते, तो फिर गुलाम हो जाओगे
इन नेताओ के चक्कर में, झंडू बाम हो जाओगे


Monday, March 25, 2013


नेताजी कह गए अबकी रखो सबर होली में
वह भूल के भी न आये लेने खबर होली में

मिठाई गुझिया तो नहीं आते ख्वाब में भी 
यह महगाई जो बढ़ा दी इस क़दर होली में

रंग खरीद न सके तो कालिख लिए बैठे है 
लगता नेताजी कालिख से गए डर होली में

मुफ़लिसी दगा दे गयी हमसे सच कहला के  
कर दिया अमीरी ने हमें जिलाबदर होली में

रंग गुलाल पिचकारी सब तुम्हे हो मुबारक 
हमको नसीब नहीं मरने को ज़हर होली में   

   

Saturday, March 23, 2013


बुरा न मानो होली है -------------अर्ज़ किया है 

अबकी होली के रंग कुछ फीके पड़े है 
नए एक्ट से महिलाओ के भाव बढे है 

रंग डालना मना किसी धारा में न हो
यह सोच सोच कर लोगे कान खड़े है

वो अक्सर करते थे मोहब्बत के चर्चे    
अब तो प्यार की गली में भी कचड़े है

मोहन बुढ़िया को लड़की समझ छेड़े 
पुलिस जाने क्यों तिवारी को पकडे है  


      

Thursday, March 21, 2013


 १ 


प्रत्याशी लेकर आ गया, देखो एक बेजोड़ 
बिनती करू आपसे, दोनों आपन कर जोड़ 
मिला समर्थन आप का, न टूटेगा विश्वास
सोच ये विजयी बनाये, यही मेरी अरदास
 २ 


हर आँख में दहशत का मंज़र है कोई देखने वाला
दिल की बाते दिल में रहती किसको जा बतलाऊ 
अब ऐसे में तुम ही बोलो मै किसको व्यथा सुनाऊ
३ 

सुना है आज झूठ के पर निकल आये है 
हम भी सुन के यह खबर निकल आये है
सत्य की जीत होगी मिलेगा समर्थन जो 
हमलोग छोड़ अपना घर निकल आये है
४ 

जातिवाद का असर गवार से शिक्षित तक है
ऐसे में कोई गैर जीत जाय तो उसका लक है
जहाँ पसीना आपका होगा वहाँ खून गिरायेगे 
क्षमा करे वोट पर पहले मेरी जाती का हक़ है
५ 

भ्रष्टाचार इस देश में मुद्दा कभी बन जायेगा 
इसे मिटाने की खातिर कोई मसीहा आयेगा
खिल उठेगा गुलशन अपना फूलो के रंगों से
झूठ कभी जीता क्या सत्य से लड़ी जंगो से
 ६ 

अब यहाँ बोली लगती इमान की ताज्ज़ुब है
फिर भी इज्जत है हुक्मरान की ताज्ज़ुब है
मिला मौका गुनाहगार को सबूत हटाने का 
चन्द मुआवजा कीमत जान की ताज्ज़ुब है
७ 

जो मुकदमा गया लिस्ट पर वो कोमा में चला गया
न्याय के मंदिर में आकर वह गरीब तो छला गया 
इसीलिए कहता हूँ यह समस्या जो हल करवाएगा 
सिर्फ वह प्रत्याशी इस बार हमारे वोटो को पायेगा
८ 

आप रहो सब साथ हमारे विजई होकर देखेगे 
फिर सूरज के रथ को बोलो जुगनू कैसे रोकेगे 
नक्शा नया बन जायेगा अपने इस कैम्पस का
कोई गड़बड़ काम करेगा हम मिलजुल टोकेगे
९ 

कोरा कागज हूँ जो चाहे तस्वीर उकेर दे 
देकर अपना सहयोग मुस्कान बिखेर दे
आये है हम भी सलीके से आप के सामने 
आप मेरे भी ऊपर हाथ सफ़्क़त के फेर दे 



           
चुनाव ख़त्म हो जाये मिज़ाज की बात 

चुनाव के पहले मतदाता को देख नेता जी रुआसे हो गए 
पर चुनाव बाद न जाने क्यों उसके खून के प्यासे हो गए
पहले कहते थे ये मतदाता ही मेरे चेहरे के चाँद सितारे है
अब कह रहे ये साले तो चेहरे पर जैसे किल मुहांसे हो गए  

  

Sunday, March 17, 2013


रखना हाथ सफक़त का, सबकी खैर रखना 
मज़हब की नफरतो पर, कभी न पैर रखना
पेश करते रहो सबूत, ऐसे जिन्दा दिली का 
मजहब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना


Saturday, March 16, 2013

नश्वर शरीर को देख देख कर झूठे क्यों इठलाऊ
जो मिल जाए साथ आपका तो मै धन्य हो जाँऊ
मेरी प्रभु से है यही कामना और अर्जी यही हमारी 
बस मै किसी को किसी रूप में भी काम आ जाँऊ 

   

Friday, March 15, 2013


आदमियों पर नहीं शैतान का खतरा 
पर मंडरा रहा है खानदान का खतरा 

जान की कीमत जो मुआवजा मिला 
उसके भी बंटवारे में जान का खतरा

इंसानियत रिश्ते दागदार हो जायेगे  
क्योकि इंसान को है इंसान का खतरा 

यह कैसी उलटी अब हवा चल पड़ी 
बेईमानो को लगा इमान का खतरा  



अगर जनता देश की अक्लमंद हो जाये
फिर कितनो के धंधे गोरख बंद हो जाये

सोने की चिड़िया भारत फिर हो जायेगा
देश की ये जनता ईमानदार चंद हो जाये   

मंदिर में कहा चढ़ा दूँगा सोने का मुकुट 
कुछ घोटाले से रूपये का प्रबन्ध हो जाये   

चुनाव आसान जितना इस देश में बहुत  
अगर गुंडे मवालियो से सम्बन्ध हो जाये  




चार दिन की जिन्दगी सो कन्धा भी दिया चार ने 
इंतजाम ठीक है सुकून सहारा दिया इस विचार ने

बस भाग दौड़ करते रहिये जिन्दगी मौत के बीच 
भाई वैसे क्या गणित लगायी उस परवरदिगार ने

प्रेम लूट छिनैती छिनारा सब किया चार दिन में 
कह रहा है चार दिन छकाया मौत के इंतजार ने 

राम का नाम कभी लिया नहीं जब तक जान थी 
पर उसी को सत्य कहा अंतिम बिदाई के कहार ने 







आना जाना लगा रहेगा, यह कहाँ है टलने वाला
आज लेखनी भी अमर है, जो लिख गयी है हाला 
न रहा वह अंदाज़ अनोखा, वह बेबाकी नहीं रही 
उनकी जयंती को बस, याद करा गयी मधुशाला



सब कुछ न्योछावर कर देते वह अपने खासो पर 
अपनी जिन्दगी दावं लगी है शतरंज के पासो पर

सोच सियासत की इस मुल्क में कितनी गन्दी है  
नेता सियासत करने लगे है जवानों की लाशो पर 

न जाने क्या सोच में आकर हम वकालत कर बैठे  
दिल घबराने लगता है अब तो उधार की साँसों पर 

लूट घसोट मचाने वालो तुमने कभी यह सोचा है 
सभी जायेगे श्मशान के रास्ते केवल दो बांसों पर 



Thursday, March 14, 2013

घेर दिया नारी को तुमने कानूनी कँटीले तारो से 
निज़ात इससे मिलेगी क्या ज़ुल्मो अत्याचारों से 
यह सोचा है जवानी की लकीर खींचने वालो कभी 
ज़ुल्मी कब कहाँ डरते सुविधा युक्त कारागारो से 
क़ानून बनाने से पहले नियत सोच बदलनी होगी 
वरना भीख माँगते लोग मिलेगे यहाँ गुनहगारो से  



Tuesday, March 12, 2013


ग्रेजुअट हो गए बाबू नक़ल मार के 
अब घूम रहे है दफ्तर बेरोजगार के 
गोली बम चलाये प्रधानी चुनाव में 
कहे बन के नेता रख देंगे सुधार के
धारा चोरी छिनैती डकैती के साथ   
और लगे है मुकदमे बलात्कार के
जबान से सत्य अहिंसा के पुजारी  
वो जो पहले तस्कर थे हथियार के  




हमारे लिए तो नैतिकता का नारा 
घोटाले को अपना बनाया है चारा
आँते भी भूख को छिपाने लगी है 
शर्म भी देखकर शरमाने लगी है 
ये आपस में यहाँ अब भुना रहे है
बेईमान ओठ अब गुनगुना रहे है   
तुम हमारे लिए हम तुम्हारे लिए 


Monday, March 11, 2013

नेता ऊँघ रहे संसद में बहुत ही हुसियारी से 
वर्दी वाले भी गर्सित है आज इसी बीमारी से

किसी की रक्षा क्या करेगे जो खुद बेपरवाह है 
आज सभी उब चुके है इनकी इसी मक्कारी से

जहाँ लुट पड़े वहाँ टूट पड़े ये इनकी सोच बनी
बचना लगता है कठिन इनकी कटियामारी से 

इनकी फर्जी कमाई में हिस्सा बाँटने आ जाते 
इसीलिए ये क्यों डरे अब किसी अधिकारी से 



  


कुछ सच्चे दोस्त जो पक्के थे पक्के रह गए 
कुछ की देख के हरकते हम भौचक्के रह गए

उत्कोच के बिना पढ़ाई लिखाई व्यर्थ हो गयी 
बेरोजगारी का आलम खाने को धक्के रह गए

पार्टिया विधवा हो गयी नेता बिना इस देश में 
हर राजनितिक दलों में शिर्फ़ उचक्के रह गए

ब्रह्मचारी जी के बच्चो की यह फ़ौज देख कर 
कुंवारिया और कुंवारे भी हक्के बक्के रह गए




भारत माँ की गरिमा, अब कौन पूजता संसद में
जिसे जीता कर हमने भेजा, वो ऊँघता संसद में

कौन सा मुद्दा कैसा मुद्दा, अब बहस कहा होती है 
शांत हो जाइए बैठ जाइए, यही गूंजता संसद में

लाखो करोडो का नाश्ता-भोजन, चट कर जाते है 
आम आदमी के लिए अब, कौन जूझता संसद में



यह कैसा है भारत का गणतंत्र तो देखो
जनता के खिलाफ होता षड़यंत्र तो देखो

भूना गया आदमी महगाई के तंदूर पर 
खून चूसने वाला सरकारी तंत्र तो देखो
रही नारी जबतक शर्मो हया के परदे में 
बन्धन से हुई यह नारी स्वतंत्र तो देखो

होती जहाँ नारिया देवता करते रमण
अपमानित होता यह महामंत्र तो देखो





मेरा गाँव भी तो शहरी इलाको से मारा गया 
मुफलिसी में मै भी रहा फांको से मारा गया
सोचा शहर जाकर करू दो वक्त का जुगाड़
आया जो शहर सुबह धमाको से मारा गया





लागी वर्दी में दाग ---------------------छुडाऊ कैसे


है यही हूनर पुलिस का जांच को मोड़ देते है 

शरीफ उनसे उलझे तो ये गर्दन तोड़ देते है 

खिस्से इनकी बहादुरी के तो तमाम मिलेगे 

पर पड़ा पाला जब गुंडों से ये रण छोड़ देते है







भागो नहीं बदलो --------------------------अर्ज़ किया है


जातिवाद का असर गवार से शिक्षित तक है
ऐसे में कोई गैर जीत जाय तो उसका लक है
जहाँ पसीना आपका होगा वहाँ खून गिरायेगे
क्षमा करे वोट पर पहले मेरी जाती का हक़ है

Saturday, March 9, 2013



जाने कैसी चल पड़ी, यह कानून की रेल 
सीनियर तो मौज में, जूनियर रहे है झेल

बदली बेंच सभी, उठी बार बार जब मांग 
इस कोर्ट से उस कोर्ट, बस सभी रहे भाग 

इस भागम भाग में, अब कौन पढ़ेगा केस 
देखे अब कौन जीतता, बस मच हुई है रेस 

मुवक्किल का केस, है खारिजा में तब्दील 
तभी बोला दलाल ने, तेरा कौन रहा वकील 

जाकर उनसे कह दो, अब एक बात दो टूक 
दबा न सकेगी आवाज, शासन की बन्दूक


तर्क सामने रखना, है काम वकील का 
भाषण तो नाम न दे, उसके दलील का

सच आ ही जाता है, अदालत के सामने 
बनी नज़ीर साबित है, पत्थर मील का

झुकते झुकते, हो गयी स्पांडलाइटिस 
बार बार परीक्षा न लो, उसके शील का

मांगता फीस जरुर, उस पर अड़ता नहीं 
अन्य से न तुलना करो, उसके दिल का 

रहे बेफिक्र फीस से, कहते गए लेकिन 
अबकी हिसाब तो करो, पुराने बिल का

खारिज हुआ मुकदमा, सियाह पड़ गए 
उतना सियाह वर्ण, नही होगा नील का


               
चुनाव में मिले पूड़ी हलुआ तो कोई बात नहीं
ऐसे में नेता रहेगा ठलुआ तो कोई बात नहीं

वैसे हम हिंदुस्तानी क्वालिटी पर ध्यान कहाँ 
बस मिले थोडा सा घलुआ तो कोई बात नहीं 

कोयला, हेलीकाप्टर, बैशाखी सब लूटा गया
पूरा चारा खा गया ललुआ तो कोई बात नहीं

सारे अरमान अब तो दबोच लिया दहेज़ ने
ऐसे में बीबी मिले कलुआ तो कोई बात नहीं

पाँच साल मौज किये इनकी वेवकुफी पर
चुनाव भर चाटा तलुआ तो कोई बात नहीं

पैसा जमा कर आये विदेश नाम बदल कर
साले नाम रखे मकलुआ तो कोई बात नहीं






अरमान माँ बाप का बेटा आगे बढ जायगा
इलाहाबाद जा कर कुछ लिख पढ़ जायेगा 

पहली समस्या आयी थी वह थी मकान की
उडनी शुरू हुई धज्जिया वही से अरमान की

पढ़ लिख नौकरी के लिए फोटो साटता रहा
नौकरी मिली नहीं सिर्फ वक्त काटता रहा

सोचा नौकरी से अच्छा जलवा वकीलों का
उसी दिन से रास्ता चुन लिया कंटीलो का  
      
बेरोजगार था चला बेरोज़गारी पर आ गया 
वकालत में आकर तो बेगारी पर आ गया 



Friday, March 8, 2013



जागरूक जनता जब देश की सवाली हो जाएगी
बंद उसी दिन से राजनीती में दलाली हो जाएगी

फिर से बढेगा रुतबा इस देश में ईमानदारी का 
और बेईमानो की हालत फिर माली हो जाएगी 

बेईमानो का फिर जेल में ही रहेगा आशियाना 
वो जायेगे जेल जिनकी कमाई काली हो जाएगी 

निगाहे फिरी मोहब्बत की पत्नियों की पति से 
समझो फ़ौरन पति के करीब साली हो जाएगी







आवास इनका वहा जहाँ से साइलेंस जोन लगता है 


नेता भी अब तो आतंकवादियो का क्लोन लगता है 


मरने वाले मरते रहे अब तो इससे इनको लेना क्या 


सरकार में बैठे लोगो को धमाका रिंगटोन लगता है


जिन्दगी मौत की अमानत यह बताने के बाद 
सिहर जाता है इन्सान यह याद आने के बाद 

मौत तेरी ख़ूबसूरती का तो होता हसीन आलम 
लोग जिन्दगी भी छोड़ देते है तेरे आने के बाद