Kailash Prakash Pathak
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Monday, September 30, 2013
जानवरों ने फ़रमाया खाया चारा पचा के दिखा
बेजुबानो की गवाही से अपने को बचा के दिखा
अब तक तो सबको नचाता रहा यहाँ से वहाँ तक
ज़रा अब कानून को भी अंगुली पे नचा के दिखा
Friday, September 27, 2013
जीते जी माँ बाप पर, दिया कभी नहीं ध्यान
वही श्राद्ध पक्ष में मरने पर, करा रहे जलपान
हमें मारो तुम जब तक चाहो, हम वार्ता जारी रखेगे
गला काटने कब आओगे, हम उसकी तैयारी रखेगे
Thursday, September 26, 2013
गुटखा पान सिगरेट के साथ, जीने का ख्वाब छोड़ दे
कर बद्ध निवेदन करु आपसे, की पीना शराब छोड़ दे
टॉप टू बॉटम जुगाड़ और सिर्फ जुगाड़ से काम बनता है
महिमा ऐसी जुगाड़ की, गहे जिसकी बाहि
हरि मिले जुगाड़ से, बिन जुगाड़ हरि नाहि
लगा गुमटी कचहरी के बगल, पान बेचने लगा
फिर धीरे धीरे वह भी, कानूनी ज्ञान बेचने लगा
आज खड़ा वो, शहर के मानिन्दो के साथ साथ
चर्चे है ईमानदारी के, जब से ईमान बेचने लगा
Wednesday, September 25, 2013
मैंने जलाया च़राग हवाओ के खिलाफ़
तो किरकिरी बन गया उसकी आँख का
आहत ना करो मान सम्मान को
तकलीफ होती है हिंदुस्तान--को
कभी फायदा भी हुआ है-----क्या
किसी दंगे से हिन्दू मुसलमान को
कभी न आओ नेता की बाँतो--में
उन्हें क्या पड़ी किसी के जान को
यूं नियति तुम्हारी खोटी है
और सोच तुम्हारी छोटी है
असर करती कैसे शर्मो हया
ये खाल भी तुम्हारी मोटी है
देश में लोग देते आये धर्म निरपेक्षता की मिसाल
अब वही पर देने लगे है लोग म्लेक्षता की मिसाल
दागियो को दे कर भागीदारी पवित्र संसद भवन में
सभी पार्टियो ने पेश की शर्म निरपेक्षता की मिसाल
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई
कहने को तो सब भाई भाई
वैसे तो सब कभी ना लड़ते
इन्हें लड़वाती कांग्रेस आई
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