सब कुछ न्योछावर कर देते वह अपने खासो पर
अपनी जिन्दगी दावं लगी है शतरंज के पासो पर
सोच सियासत की इस मुल्क में कितनी गन्दी है
नेता सियासत करने लगे है जवानों की लाशो पर
न जाने क्या सोच में आकर हम वकालत कर बैठे
दिल घबराने लगता है अब तो उधार की साँसों पर
लूट घसोट मचाने वालो तुमने कभी यह सोचा है
सभी जायेगे श्मशान के रास्ते केवल दो बांसों पर

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