वकालत के पेशे में तो, बड़ा झंझावत है भाई
अकेले में सोचो तो, बस आँसू आवत है भाई
मुकदमा न मिले तो, भविष्य खोने की चिंता
इसी बात की डर, अब बहुत सतावत है भाई
ग़र वो मिलने लगे तो, उसके होने की चिंता
अदालत से आ कर, अक्सर बतावत है भाई
दिन रात फोन पर, मुवक्किल से किचकिच
चौबीसों घंटा अब यह पेशा, खटावत है भाई
इसमें कोई मोहब्बत से, कबहू बोले न बोली
भले दूसरे का दुःख दर्द, हम हटावत है भाई
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