पलके बिछा राह जोहता ही रहा मै खड़े खड़े
कान को भेदते रहे तेरे शब्द वो भी कड़े कड़े
मै तो नाचता ही रहा हूँ तेरे इशारे पर हरदम
फिर क्यों कर दिया मेरे अध्यादेश के टुकड़े

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